जवाब मुझसे पूछते हो मैं परेशान उन्ही सवालों में; क्यों ख्ता मैने मुहब्बत की की क्यों उलझा रहा ख़यालो में; मुहब्बत सबका मुक्कद्दर नहीँ यह कहकर दामन टोड दिया ; जैसे शब के खवाब जल गये सुभो के उजालो में