लौटकर मेरी दुनिया में बाद सदियों जो फिर कभी आप आओगे वक़्त की मिट्टी में दफ़न गुज़रे लम्हो की बस राख पाओगे ;
जिन पेड़ो से टूट के पत्ते सब रिश्ते भूल जाते है ;
हवाओं उन सज़र का गम समझना तुम जिसकी शाख हिलाओगे