जबभी तेरी यादों के चराग़ जल उठते है
मैं ख़यालो में कहीं दूर निकल जाता हूँ;
फिर से तन्हाइयाँ घेर लेती है मुझे;
मैं वो मौसम हूँ जो फिर गम में बदल जाता हूँ