rediff ILAND
Welcome Guest, | Create your own iLand| Sign In  | New User? Get Started
Home
iLand
Blogs
Friends/Contributors
Guestbook  
 
rakesh
Categories
Music
Poetry
Takleef
Lamho Kee Raakh
Khawab Jal Gaye
Narma Subho Ke...
Muhhabbat Ke...
Khuda Samjhe...
Ujaalo NeThukraaya
AVYAKT BHAGYA
Tanhaaiyan Gher...
Subho aagayi...
MUHABBAT KO MEFOOZ
Aaiene Badal...
Favourites 1
rakesh
What is an RSS feed?
RSS Feed 
alwaysraakeysh.rediffiland.com/ 
Recent Posts
 10:30 | 23/Dec/2007 | 3 Comment(s)
Aaiene Badal Jaayenge

हमे जो पहचानते थे कभी, घर के वो आईने बदल जाएँगे; 
वक़्त के साथ हर एक मरासिमो के माएईने बदल जाएँगे
.

Permalink 
 10:19 | 23/Dec/2007 | 1 Comment(s)
MUHABBAT KO MEFOOZ

जो दिल मूहब्बत को मेफ़ूज़ भी ना रख सके 
उस दिल का टूट कर कूचल जाना ही बेहतर है ;
जो मुल्क मुहब्बत की पाक़िज़गी से हिफ़ाज़त ना कर सके  ;
ऐसी दूनिया को छोड़ कर निकल जाना ही बेहतर है

Permalink 
 00:03 | 22/Dec/2007 | 0 Comment(s)
Subho aagayi chowkhat par

 सूबहो  आगाई चौखट पर चलो इस

मैखाने से चले

घर कर रहा होगा इंतेज़ार कोई इसी

बहाने से चले

Permalink 
 22:41 | 21/Dec/2007 | 1 Comment(s)
Tanhaaiyan Gher Leti hai

जबभी तेरी यादों के चराग़ जल उठते है 

मैं ख़यालो में कहीं दूर निकल जाता हूँ;

फिर से तन्हाइयाँ घेर लेती है मुझे;

मैं वो मौसम हूँ जो फिर गम में बदल जाता हूँ

Permalink 
 07:42 | 21/Dec/2007 | 0 Comment(s)
Avyakt Bhagya

अतीत गूरुकल भिक्षा के लीए



वर्तमान गुरू शिक्षा के लीए ;



जीवन कर्म करने के लीए ;



आयवक्त भाग्या प्रतीक्षा के लीए

Permalink 
 07:54 | 19/Dec/2007 | 1 Comment(s)
Narma Subho Ke Ujaale

आहिस्ता सख़्त अंधेरो को  काट ते है  नरम सुबो के उजाले




जर्रा जर्रा वक़्त भी जिस के आगे सर झुका ले 




कहाँ उसके सामने अपनी मर्ज़ी चलती  है 




यह सियासत उसकी है जो कायनात संभाले 

Permalink 
 00:14 | 19/Dec/2007 | 1 Comment(s)
Lamho Kee Raakh

लौटकर मेरी दुनिया में बाद सदियों  जो फिर कभी आप आओगे 
वक़्त की मिट्टी में दफ़न गुज़रे लम्हो की बस राख पाओगे
  ;



जिन पेड़ो से टूट के पत्ते सब रिश्ते भूल जाते है  ;



हवाओं उन सज़र का गम समझना तुम जिसकी शाख हिलाओगे 

Permalink 
 17:09 | 16/Dec/2007 | 2 Comment(s)
Khawab Jal Gaye

जवाब मुझसे पूछते हो

मैं परेशान उन्ही सवालों में;

क्यों ख्ता मैने मुहब्बत की की

क्यों उलझा रहा ख़यालो में;

मुहब्बत सबका मुक्कद्दर नहीँ

यह कहकर दामन टोड दिया ;

जैसे शब के खवाब जल गये

सुभो के उजालो में

Permalink 
 00:15 | 16/Dec/2007 | 3 Comment(s)
Muhhabbat Ke Buniyaad


आसू बनके गिरते है मुहब्बत के बुनियाद 

तेरी  आखों से

सिसक सिसक कर  दम तोड़ती है याद 

तेरी आखों से
 

Permalink 
 00:06 | 15/Dec/2007 | 2 Comment(s)
Khuda Samjhe Jaate hai



मुहब्बत के माने जहाँ खुदा समझे जाते है

वो दुनिया खूबसूरत कही और रक्खी है ;

वक़्त के साथ जिन मारासिमो के माने बदल जाते है;

यक़ीनन उसकी नीव कमज़ोर रक्खी है

Permalink